ज़िम्मेदारी
तुमने गिलहरी वाली कहानी सुनी है? जब श्री राम, वानर सेना की मदद से सागर पर सेतु बना रहे थे, तो उनकी सहायता के संकल्प से एक छोटी सी गिलहरी भी बालू ला ला कर डाल रही थी। कार्य करते समूह के कुछ सदस्य उसके इस कृत्य पर हंसे भी, ‘एक छोटी सी गिलहरी क्या योगदान कर पायेगी!’ पर वह गिलहरी प्रसन्न थी कि श्री राम की सेना में उसकी भी एक भूमिका थी। वह प्रसन्न थी कि उसके करने लायक भी यहां कुछ काम था। श्री राम उस पर बहुत प्रसन्न हुए और प्यार भरा आशीर्वाद देते हुए उसकी पीठ पर हाथ फेरा। गिलहरी इतनी छोटी थी, कि श्री राम की केवल तीन ही अंगुलियों से उसकी पीठ ढक गई, और उन तीन अंगुलियों की छाप उसकी पीठ पर पड़ गई। ये एक काल्पनिक कहानी हो सकती है, पर इसका संदेश है – ‘भगवान सब कुछ कर रहें हैं, फिर भी, हमारी भी कुछ ज़िम्मेदारी है। हम जो भी कर पायें, करें।’ जितना हम कर सकते हैं, उतना करना हमारी ज़िम्मेदारी है।