महिला सशक्तिकरण

 

‘समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। समाज में स्थिरता, मज़बूती एवं सामंजस्य का होना मुख्यतः महिलाओं पर निर्भर करता है। महिलायें समाज का एक सशक्त आधार हैं।’ - श्री श्री रविशंकर

 

women_empower1.jpg महिलाओं में आत्म विश्वास और स्वतंत्रता का सृजन

महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, श्री श्री की एक अदभुत पहल है जिस से विश्व भर की महिलाओं जो जहां उन्हें मज़बूती की ज़रूरत हो, वहां उनके लिये व्यावसायिक प्रशिक्षण, माइक्रोफाइनांस की मदद, आत्मविकास कार्यशालाओं और स्व-सहायता समूह की व्यवस्था की जाती है।

 

इसकी शरुवात, भारत के बैंगलोर में विस्टा इंडिया (वैल्यू इन्टिग्रेटेड सर्विसेस टू आल) के नाम से शुरू हुई, जिससे २०० से अधिक ग्रामीण महिलाओं को लाभ प्राप्त हुआ। विस्टा इंडिया की सफलता से प्रेरित हो कर महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को भारत में अन्य स्थानों एवं अन्य देशों जैसे कि श्रीलंका, दक्षिण अफ़्रीका और इराक में शुरू किया गया। दक्षिण अफ़्रीका के ओहलांगे समुदाय के तीस प्रतिभागियों के समूह ने अफ्रीकी मनको की सुंदर शिल्प कला को सीखा और ३०० से अधिक महिलाओं ने आत्मविकास कार्यशालाओं में भाग लिया। महिलायें अब संगीत और ध्यान की कार्यशालाओं की निरंतर मेज़बानी करती हैं और मनको का सफल शिल्प उद्योग चलाते हुये आर्थिक समृद्धि की राह पर हैं।

 

प्रशंसापत्र
"इस कार्यक्रम से हमारे लोगों को स्वालंबी होने में बहुत मदद मिली है। अब हम भिखारी नहीं रहे। इससे हमारे आत्मसम्मान में बहुत वृद्धि हुई है।"
- मूज़ी माफुमुलो, संचालक, ओहलांगे मनका कार्यक्रम, दक्षिण अफ़्रीका

"मैं ३०० महिलाओं के एक स्व-सहायता समूह की मुखिया हूं। हमें द आर्ट आफ़ लिविंग संस्था की मदद चाहिये, इन महिलाओं में आत्मविश्वास जगा कर उन्हें व्यवसायी बनाने में, अपने समुदाय के मुखिया के रूप में आगे आने में और चुनाव में भाग लेने के लिये।"

- लक्ष्मी कृष्णमूर्ति, मलूर, कर्नाटक

 

भारत के झारखण्ड प्रदेश में, स्थानीय महिलाओं के शहद का उद्योग शुरु करने के लिये प्रशिक्षित किया, और आज वे देश के अग्रणी शहद व्यापारियों को शहद उपलब्ध करा रही हैं।

 

‘पुनर्नवा कार्यक्रम’ के अंतर्गत, बैंगलोर के सेन्ट्रल जेल में कैद महिलाओं को आर्ट आफ़ लिविंग संस्था ने अगरबत्ती एवं हस्त-शिल्प बनाने का प्रशिक्षण दिया। जब ये महिलाये जेल से रिहा होती हैं तब इन सामग्रियों से हुई आय एवं बचत से उन्हें आर्थिक सुदृढ़ता प्राप्त होती है। इस तरह के कार्यक्रम भारत की अन्य जेलों में भी चलाये जाने लगे हैं।