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१९५६, १३ मई: पापनासम, तमिलनाडु, भारत में जन्में।

 

१९६०, आयु ४ वर्ष: संस्कृत में श्रीमद्‍भगवत गीता ग्रन्थ, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था, सुना कर चकित कर दिया। ।

 

१९६२, आयु ६ वर्ष: अपने पहले गुरु पंडित सुधाकर चतुर्वेदी जो कि महात्मा गाँधी के करीबी सहयोगी थे के सानिध्य में वेदों की शिक्षा ग्रहण करना आरंभ किया।

 

१९६६, आयु १० वर्ष: परिवार और मित्रों के मध्य में घोषणा की, कि ‘पूरे विश्व में लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं। एक दिन मैं उनके पास जाऊँगा।’

 

१९७३, आयु १७ वर्ष: वैदिक साहित्य की पारंपरिक शिक्षा और आधुनिक विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

 

१९७७-१९८२: व्यापक यात्रायें करते हुये प्रवचन दिये तथा प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरूओं जैसे कि आनंदमयी माँ, तिरुची स्वामी और महर्षि महेश योगी के निकट सानिध्य में रहे।

 

१८९१, आयु २४ वर्ष: भारत में बैंगलोर शहर के बाहर ग्रामीण क्षेत्र में पहले विद्यालय की स्थापना की।

 

१९८२, आयु २५ वर्ष: मौन व्रत एवं साधना के दौरान सुदर्शन क्रिया का साक्षात्कार कर के आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्स की रचना की, तथा द आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था की भारत के बैंगलोर शहर में संस्थापना की।

 

१९८६, आयु २९ वर्ष: भारत के राष्ट्रपति ने ‘योग शिरोमणी’ (योग का सर्वश्रेष्ठ रत्न) की उपाधि से सम्मानित किया |

 

१९९५: कैदियों के लिये तनाव-मुक्ति तथा पुनर्वसन प्रशिक्षण कार्यक्रम की भारत तथा संयुक्त राज्य अमरीका में शुरूआत की।

 

१९९५: ८ से १३ वर्ष के बच्चों के लिये आर्ट एक्सेल कोर्स (आल राउंड ट्रेनिंग इन एक्सिलेंस ) की शुरूआत की |

 

१९९७, आयु ४१ वर्ष: मानवीय मूल्यों के लिये अंतर्राष्ट्रीय संघ (IAHV Internationl Association for Human Values) की स्विट्ज़र्लैंड के जिनेवा शहर में स्थापना की। ग्रामीण विकास के लिये 5H कार्यक्रम की पहल की।

 

१९९८, आयु ४२ वर्ष: १३ से १८ वर्ष के किशोरों के लिये युवा सशक्तिकरण शिविर (YES! Youth Empowerment Seminar) की शुरूआत की|

 

१९९९, आयु ४३ वर्ष: श्री श्री रविशंकर विद्यामंदिर की स्थापना की| (http://ssrvm.org)

 

२०००, आयु ४४ वर्ष: ग्रामीण और शहरी युवाओं को सामजिक और आर्थिक परिवर्तन के लिये नेतृत्व करने का प्रशिक्षण देने के लिये युवा नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर की शुरूआत की|

 

२००१, आयु ४५ वर्ष: नैतिकता और मानवीय मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिये श्री श्री सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (Sri Sri Centre for Media Studies) की स्थापना की।

 

२००३, आयु ४७ वर्ष: आर्ट ऑफ़ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, बैगलोर में विशालाक्षी मंडप का उद्घाटन किया। यहां २००० लोग आराम से एक साथ बैठ कर ध्यान कर सकते हैं।

 

२००३ : श्री श्री रविशंकर प्री युनिवर्सिटी कॉलेज और श्री श्री सेंटर ऑफ़ परफाँर्मिंग आर्टस एन्ड फाइन आर्टस (Sri Sri Ravi Shankar Pre-University College and Sri Sri Center of Performing Arts and Fine Arts) की स्थापना की।

 

२००४, आयु ४८ वर्ष: भारत में करनाटक के कुवेम्पु विश्विद्यालय नें श्री श्री को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया।

 

२००४: भारत के बैंगलोर शहर में ‘कारपोरेट संस्कृति तथा आध्यात्म’ सम्मलेन का प्रथम आयोजन किया। इस सालाना सम्मलेन का ध्येय है व्यापार, नैतिकता एवं सामाजिक जिम्मेदारी का गठबंधन।

 

२००४: ऐतिहासिक ‘लव मूव्ज द वर्ल्ड यात्रा’ में १२ महीनों में ५ महाद्वीपों के १७५ शहरों का दौरा किया।

 

२००४: श्री श्री आयुर्वेदिक विज्ञान और अनुसंधान महाविद्यालय की स्थापना की, भारत के बैंगलोर शहर में। यहां छात्रों को आयुर्वेदिक चिकित्सा में स्नातक उपाधि प्रदान की जाती है।

 

२००५: भारत सरकार नें भारत शिरोमणी सम्मान से सम्मानित किया गया |

 

२००५: प्रथम अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मलेन, बैगलोर स्थित ‘द आर्ट आफ़ लिविंग इन्टर्नैशनल सेन्टर’ में आयोजित किया।

 

२००५: कृषकों को कम लागत से होने वाली प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिये श्री श्री कृषि विज्ञान और अनुसंधान संस्था (Sri Sri Institute for Agricultural Science and Research) की शुरूआत की।

 

फरवरी २००६, आयु ५० वर्ष: १०० से अधिक देशों के २५ लाख लोगों नें बैंगलोर आकर ‘द आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के रजत जयंती समारोह में भाग लिया। विश्व इतिहास में शांति के लिये आज तक के सब से बड़े आयोजन के रूप में यह दर्ज हुआ।

 

अगस्त २००६: श्रीलंका में शांति की स्थापना के लिये, महाबोधी समिति के साथ मिलकर एक समिति का गठन किया। समिति के सदस्य हैं, दलाई लामा, श्रीलंका के आर्चबिशप और डी. आर. कार्तिकेयन।

 

२००६: श्री श्री इन्स्टिट्यूट आफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ (Sri Sri Institute of Management Studies) की भारत के गोवा प्रदेश में स्थापना की।

 

मार्च २००७, आयु ५१ वर्ष: नई दिल्ली, भारत में उच्च जाति एवं दलित लोगों के बीच जातिवाद के भेदभाव को समाप्त कर सामंजस्य लाने के लिये ‘ट्रूथ एन्ड रिकंसिलिएशन’ (सत्य और सुलह, Truth and Reconciliation) सम्मलेन का आयोजन किया|

 

अप्रैल २००८, आयु ५२ वर्ष: ओस्लो नॉर्वे में दक्षिण एशिया में शांति और सुलह के लिये ‘पीस एंड रिकंसिलिएशन’ (Peace and Reconciliation in South Asia) सम्मलेन की मेजबानी की|