इराक
संघर्ष से बिखरे हुए इराक का पुनर्निर्माण
सन २००७ के विफल राष्ट्र सूचकांक के अनुसार, निरंतर हिंसा और संपत्ति तथा जान की हानि जैसे आघातों की वजह से, इराक विश्व का दूसरा सबसे अस्थिर देश था। सितम्बर २००३ से बग़दाद, बसरा, सुलेमानिया तथा कर्बला से लगभग ५००० से ज्यादा लोगों ने आर्ट आफ़ लिविंग के आघात-राहत कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस से लाभान्वित ४३ लोगों नें सन २००६ में, अधिक संख्या में लोगों को लाभान्वित करने की दृष्टि से इस कार्यक्रम का प्रशिक्षक बनने की इच्छा जतायी, और आज की तारीख़ में इराक में ५० आर्ट आफ़ लिविंग प्रशिक्षक हैं, तथा १५० पंजीकृत स्वयंसेवी हैं।
सन २००५ में इराकी महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इससे ५०० इराकी महिलायें लाभान्वित हुयी। इराकी समुदाय में काफी लोकप्रिय बन चुके इस कार्यक्रम में व्यक्तित्व विकास एवं आत्मविकास के साथ ही कम्प्यूटर, तथा सिलाई का व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
२२ मई २००७ को परम पूज्य श्री श्री रवि शंकर जी ने इराकी सरकार का आमंत्रण स्वीकार करके इराक का तीन दिन का दौरा किया जिसमे उन्होंने एक शांतिदूत की भूमिका निभाई और इराक में आमंत्रित प्रथम भारतीय आध्यात्मिक गुरु बनें। इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी ने इराक के पुनर्निर्माण में आर्ट आफ़ लिविंग संस्था द्वारा निभायी गई महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुये, जेलों में अपने कार्यक्रम शुरु करने की दरख्वास्त की।
इस दौरे के दरम्यान श्री श्री नें वहां के युवा नेता, संसद-सदस्य तथा शिया, सुन्नी और कुर्दिश, विरोधी गुटो से बातचीत कर के उन से देश में अहिंसा और शांति को एक मौका देने का आग्रह किया। श्री श्री के इराक दौरे से प्रेरित होकर, बग़दाद, बसरा, सुलेमानिया, कर्बला तथा नजफ़ के ५५ इराकी नवयुवकों ने अपने देश में अमन और समृद्धि की इच्छा से अगस्त २००७ में बैंगलोर आश्रम में एक महीना रह कर युवा नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया और युवाचार्य बने। युवाचार्य यानि, समाज को प्रगति की दिशा में ले जाने वाले अग्रणी युवा ।
- इराकी प्रधानमंत्री, नूरी अल-मलिकी
"हम आपके प्रतिनिधि मंडल का खुली बाहों और खुले दिल से स्वागत करते है। हम आपको अपना भाई जानकर आपके कंधे से कंधा मिला कर काम करने को तैयार हैं।"
- शिया नेता, आयातुल्लाह मोहम्मद अली याकुबी
"हम सिर्फ मौत और निराशा के आदि थे। पर, अब हम मुस्कुराना सीख गये हैं, और यह श्री श्री की हमें बहुत बड़ी देन है।"
- आघात-राहत कार्यक्रम से लाभान्वित, शफीकुर रहमान